वो न आये तो उनकी याद आए
जी न जाए, तो क्या जिया जाए..
हसरतें आँसुओं में घुलने लगीं,
ख्वाब मेरे सभी जो मुरझाए..
नींद में कितने खौफ शामिल हैं,
हम भी देखेंगे, नींद आ जाए..
हमने चाहा नहीं गम ए फुर्कत,
आ गया है, तो भले रह जाए..
तुम न आये मगर न जाने क्यूँ,
दिल ये कहता है देखो वो आए..
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..
रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
गो न आयें, प्' उनकी याद आए...!
June 25, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
16 comments:
bahut achchi hai... :)
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए.
ye bahut pasand aaya
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..
वाह क्या खूब कहा है।
jabardast umda gazal.
रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..
रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!
वाह, क्या बात कही है!
हसरतें आँसुओं में घुलने लगीं,
ख्वाब मेरे सभी जो मुरझाए..
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..
बहुत खूबसूरत गज़ल ...
छा गए जी छा गए....
बेहतरीन...वाह.....
रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!
bahut sunder likhaa hai dipaali...
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!
bahut khoob...
स्मृति की जलती सी लौ पर असुँअन नीर बहाये।
bahut sunder
नींद में कितने खौफ शामिल हैं,
हम भी देखेंगे, नींद आ जाए.
बहुत खूब वोन आये उनकी......../ मार्मिक पोशीदा नज्म को तहे दिल से बधाई जी /
[ काफी है जीने को कोई जेहन में आ गया ] .
रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!
hmmm....
tum nahi aate
par tumhari yaad bahut aati hai
aap bhi aaiye
Naaz
आप सभी का तह ए दिल से शुक्रिया.
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..
bahut khub dipaali ji.. accha laga padhna...
तुम न आये मगर न जाने क्यूँ,
दिल ये कहता है देखो वो आए..
बहुत ही सुन्दर गजल ....
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए
lajawaab
bahut achchi gazal hai deep....
Post a Comment