June 25, 2011

वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!

वो न आये तो उनकी याद आए
जी न जाए, तो क्या जिया जाए..

हसरतें आँसुओं में घुलने लगीं,
ख्वाब मेरे सभी जो मुरझाए..

नींद में कितने खौफ शामिल हैं,
हम भी देखेंगे, नींद आ जाए..

हमने चाहा नहीं गम ए फुर्कत,
आ गया है, तो भले रह जाए..

तुम न आये मगर न जाने क्यूँ,
दिल ये कहता है देखो वो आए..

वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..

रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
गो न आयें, प्' उनकी याद आए...!

19 comments:

Arghwan said...

bahut achchi hai... :)
वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए.
ye bahut pasand aaya

vandan gupta said...

वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..

वाह क्या खूब कहा है।

अनामिका की सदायें ...... said...

jabardast umda gazal.

Smart Indian said...

रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..

रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!

वाह, क्या बात कही है!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

हसरतें आँसुओं में घुलने लगीं,
ख्वाब मेरे सभी जो मुरझाए..

वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..

बहुत खूबसूरत गज़ल ...

Shekhar Suman said...

छा गए जी छा गए....
बेहतरीन...वाह.....

manu said...

रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!


bahut sunder likhaa hai dipaali...




वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!

bahut khoob...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 28 - 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

साप्ताहिक काव्य मंच-- 52 ..चर्चा मंच

प्रवीण पाण्डेय said...

स्मृति की जलती सी लौ पर असुँअन नीर बहाये।

नीलांश said...

bahut sunder
नींद में कितने खौफ शामिल हैं,
हम भी देखेंगे, नींद आ जाए.

udaya veer singh said...

बहुत खूब वोन आये उनकी......../ मार्मिक पोशीदा नज्म को तहे दिल से बधाई जी /
[ काफी है जीने को कोई जेहन में आ गया ] .

Mridula Ujjwal said...

रास्ता तक रही हूँ मैं कब से,
वो न आयें, प्' उनकी याद आए...!

hmmm....
tum nahi aate
par tumhari yaad bahut aati hai

aap bhi aaiye

Naaz

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर

दिपाली "आब" said...

आप सभी का तह ए दिल से शुक्रिया.

deewan-e-alok.blogspot.com said...

वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए..


bahut khub dipaali ji.. accha laga padhna...

Unknown said...

वो न आये तो उनकी याद आए
जी न जाए, तो क्या जिया जाए..बहुत ही बढ़िया !
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

Unknown said...

तुम न आये मगर न जाने क्यूँ,
दिल ये कहता है देखो वो आए..
बहुत ही सुन्दर गजल ....

somali said...

वस्ल में रूह घुल गई लेकिन,
जिस्म गलता नहीं है क्यूँ हाए
lajawaab

yogesh dhyani said...

bahut achchi gazal hai deep....